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On Words: Gaslighting

Gaslighting is a form of manipulation that seeks to sow seeds of doubt in a targeted individual or in members of a targeted group, hoping to make them question their own memory, perception, and sanity. 962 kata lagi

On Words

इरम एजुकेशनल सोसाइटी द्वारा सम्पन्न हुआ कवि सम्मेलन एवम् मुशायरा एक शाम गंगा जमुनी तहजीब के नाम - शाश्वत मिश्रा

जहाँ सूर्य का प्रकाश नही पहुँचता, वहाँ कवि की कविता, नज्म, गजल और उसकी शायरियाँ पहुँच जाती है। ऐसा ही कुछ नजारा दिखा इरम वेलफेयर अवार्डस में। ं जहाँ शाम से लेकर रात तक मुशायरे और शायरियों की आवाज वहाँ पर उपस्थित लोगों के कानों को सुशोभित कर रही थी यह शाम बेहद खास थी, क्योंकि इस शाम को यादगार बनाने यहाँ पर मौजूद थे; राहत इंदौरी। जिन्होंने यहाँ पर उपस्थित युवाऔं और बुजुर्गो दोनो को अपने आप में बाँध लिया। इनकी शायरियों ने यहाँ पर उपस्थित सभी
लोगों के शरीर में रक्तप्रवाह बढंाने का कार्य किया । राहत इंदौरी का साथ देने के लिए यहाँ पर अदिति महेश्वरी, ओम निश्चल, अशोक चक्रधर, विश्वनाथ प्रसाद तिवारी, काशीनाथ सिहं, रामदरश मिश्र, विश्वनाथ त्रिपाठी, नित्यानन्द त्रिपाठी, समेत कई कवि मैाजूद थे।

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एैसे नौनिहालों का क्या भविष्य, आखिर कौन है जिम्मेदार?- अनन्या श्रीवास्तव

बचपन हर इंसान की जिंदगी का सबसे हसीन पल होता है। न किसी बात की चिंता न ही कोई जिम्मेदारी। खेलना-कूदना, पढ़ना और अपनी मस्तियों मंे खोये रहना बस यही है इस मासूम बचपन की कहानी। पर यह जरुरी नही की सभी का बचपन इतनी खुशनसीबी से भरा हो।

हाल ही में लखनऊ स्थित टेढ़ी पुलिया के पास विनायक पुरम् नाम की मलिन बस्ती पर नजर पड़ी तो वहाँ की परिस्थिति देखकर बहुत ही दःुख हुआ। खासतौर से वहाँ के बच्चों को देखकर, जिन्हें शिक्षा और खेल के बीच जीवन जीना चाहिये वो गरीबी की मार झेल कर घर के चूल्हे-चैके और मजदूरी मंे अपना सुनहरा बचपन बिता रहे है। चार सौ से अधिक झोपड़ पट्टीयों वाली इस बस्ती मंे ंमुिश्कल से कुछ ही बच्चे स्कूल जाते हैं और ज्यादातर घर के बच्चे चूल्हे चैके या फिर मजदूरी मे लगे रहते हैं क्योंकि इनके माता -पिता अपने जीवन यापन के लिए तो पैसा कमा नहीं पाते वो भला इनकी शिक्षा का खर्च कैसे उठाएंगे? इस फोटो को देख आपको छह साल की चिंकी पर तरस आ जायेगा। इस उम्र में उसके हाथों में खिलौने होने चािहये थे , लेिकन वो घर के कामों मे इस तरह व्यस्त है मानो इस घर की जिम्मेदारी का बोझ चिंकी पर हो । दरअसल इसके माँ- बाप दोनों ही काम पर निकल जाते हैं और चिंकी अकेले घर का पूरा काम करती है। क्या उसका मन नही होता होगा कि वो भी और बच्चों की तरह बेपरवाह होकर खेले – कूदे और पढ़ाई करे वैसे यह कहानी सिर्फ चिंकी की ही नही उसके जैसे और भी कई बच्चों की है। ठीक ही कहा है किसी शायर ने ‘‘गरीबों की ये बस्ती है कहाँ से शोखियाँ लाऊँ यहाँ बच्चे तो रहते है मगर बचपना नही रहता’’। वैसे हमारी सरकार ने आठवीं तक की शिक्षा को आनिवार्य और निःशुल्क कर दिया है लेकिन लोगांे की गरीबी और बेबसी के आगे यह योजना भी निष्फल साबित होती दिखाई दे रही है। वहीं गरीबी मिटानें के नाम पर भारत मे बहुत सारी योजनाएँ भी है। इन सारी योजनाओं पर कई लाख करोड़ रू खर्च हो चुके है पर इससे गरीबी नही मिटी। वैसे सिर्फ सरकार ही नहीं बल्कि आम जनता को भी इस अभिशाप को दूर करने मे सहभागिता निभानी चािहये। हर एक व्यक्ति जो आर्थिक रुप से सक्षम हो अगर ऐसे एक बच्चे की भी जिम्मेदारी ले ले तो सारा परिवेश ही बदल सकता है और तब हम अपने देश के लोकतंत्र को सफल कर पायेंगे।

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ज्ञान की एक उम्मीद - अनन्या श्रीवास्तव

शिक्षा वो नींव है जो मनुष्य रुपी मजबूत इमारत को खड़ा करने मे सबसे महत्वपूर्ण योगदान निभाती है। यह रोशनी की वह किरण है, जो मनुष्य में अज्ञानता का अन्धकार मिटाकर ज्ञान का दीप प्रज्जवलित करती है। भारत एक ऐसा देश है, जहाँ
अब भी निरक्षरता बिमारी बनकर फैली हुई हैं। 125 करोड़ आबादी वाले इस देश में मात्र एक तिहाई लोग ही शिक्षित है और इसके अनेक कारण है जैसे बढ़ती जनसंख्या, गरीबी भ्रष्टाचार, शिक्षकों और किताबोे की कमी इत्यादि। पर इन सब समस्याओं के बीच कभी कभी कुछ ऐसे फरिश्ते भी सामने आते हैं जो इन शिक्षा से वंचित लोगों को निःस्वार्थ भाव से ज्ञान की ओर ले जाते हंै और ऐसा ही एक उदाहरण हैं-लखनऊ के एक नौजवान सिद्धार्थ सिंह जो कि शहर के कुछ बच्चों के लिए आशा की किरण बनकर उभरे हैं। महज एक बच्चे से शुरुआत करते हुए वो आज लगभग 20-25 गरीब बच्चों को 5-6 घंटे प्रतिदिन मुुुुुुुुुुुफत में पढ़ाते हैं । सिद्धार्थ ने कम्प्यूटर साइंस में बी.एस.सी की है और अब वह सिविल सर्विस की तैयारी कर रहे है। उन्होंने बताया कि उनका यह सिलसिला करीब दो साल पहले मरीन ड्राइव पर शुरु हुआ था जहाँ वो अक्सर कॉलेज खत्म होने के बाद आया करते थे और यहीं पर उनकी मुलाकात शानू नाम के छोटे बच्चे से होती थी जो वहाँ पर बबल्स बेचा करता था। एक दिन बात करते करते शानू ने सिद्धार्थ से अपने अंग्रेजी पढ़ने की इच्छा जाहिर की और फिर क्या इन दोनों के बीच गुरु और शिष्य का रिश्ता बन गया । शानू को पढ़ता देख और भी बच्चे धीरे-धीरे आते गए और बिना सर्दी, गर्मी, बरसात की फिक्र करे ये रोज पढ़ने आया करते है। अक्सर बच्चे होमवर्क से डरते है पर ये बिना होमवर्क लिए जाते नही है। इन बच्चों ने भी डॉक्टर, इंजीनियर बनने का ख्वाब अपने आँखों में बुन रखा है और सिद्धार्थ इन ख्वाबों को पर लगाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं।

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ख्वाहिशों को ख्वाबों के सहारे पाया जा सकता है - कमला मिश्रा शाश्वत मिश्रा

सारांश ग्रुप और एजुकेशनल ट्रस्ट द्वारा आयोजित पुस्तक विमोचन प्रोग्राम में पुस्तक की लेखिका कमला मिश्रा ने अपनी पुस्तक “ ख्वाब औेर ख्वाहिशों “ के माध्यम से लोगों में ख्वाहिशों के सहारे ख्वाबों को पाने की बात कही है। उन्होने यह भी कहा कि यह पुस्तक आज की पीढी को ध्यान में रखकर लिखी गयी है और इस पुस्तक को पढ़कर आज का युग काफी कुछ सीख सकता है। बाॅलीवु़़़ड सितारों की मौजूूदगी दिखी बाॅलीवुड अभिनेता रजनीश दुग्गल, राजीव खंडेलवाल, विशाल मिश्रा, गायक रिषभ टंड़न, अभिनेता मीनाझी दीक्षित, फिल्म निर्माता संजीव जायसवाल, लेखक मनोज मंुतशिर, मशहूर काॅमोडियन राजीव निगम समेत कई लोग मौजूद रहे।
राजनेताओं का भी दिखा असर प्रोग्राम में डिप्टी सी.एम. दिनेश शर्मा कानून मंत्री ब्रजेश पाठक भी मौजूद थे। प्रोग्राम में ब्रजेश पाठक ने अपने भाषण में अपनी और दिनेश शर्मा के राजनीतिक सफर के बारे में बात की । तथा दिनेश शर्मा जी ने बताया कि माता पिता एक छाते की तरह होते है जो हमें मुसीबतों से बचाते है। और उन्होेने वहीँ पर मौजूद मनोज मुंतशिर से सवाल पूछा कि आप अमेठी के ब्राह्मण है तो मंुतशिर क्यों लिखते है ? इस पर मनोज ने कहा कि यह उनका उपनाम है इसलिए उन्होने मुंबई पहुँचकर इसे अपने नाम से जोड लिया। इस जवाब को सुनकर दिनेश शर्मा ने गाँधी परिवार कि ओर इशारा करते हुए कहा कि मुक्षे लगा कि अमेठी वालों को जाति बदलने की आदत है। कमला मिश्रा मेरी माँ की तरह है -(राजीव निगम) राजीव निगम ने अपने भाषण में कहा कि कमला मिश्रा मेरी माँ की तरह है और वह मेरे दिल के काफी करीब हैं वह एक बेहतरीन लेखिका है ंऔर हम सबके लिए एक उदाहरण हैं ।

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174 साल बाद दिखा अनोखा चंद्रग्रहण - शाश्वत मिश्रा

कल पूरी दुनिया एक अनोखे चंद्रग्रहण को देख रही थी जिसमें बच्चों से लेकर बूढों तक ने हिस्सा लिया। इस चंद्रग्रहण को दिखाने के लिए सरकार ने नक्षत्रशाला की टीम को क्लाॅक टावर पर तैनात किया था। जहाँ पर नक्षत्रशाला की 10 सदस्ययी टीम ने टेलीस्कोप लगाकर लोगों को चंद्रग्रहण को दिखाया और इसके बारे में बताया भी।इस मौके पर लखनऊ के हर कोने से हजारों की संख्या में लोग क्लाॅक टावर पर पहुँचे और चंद्रग्रहण का आनंद लिया। जब पृथ्वी, सूर्य और चंद्रमा के बीच में आती है तब चंद्रग्रहण होता है और इस चंद्रग्रहण को दिंखाने के लिए 5 टेलीस्कोप लगाए गए थे। – प्रिया (नक्षत्रशाला टीम)

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KASHMIRI CHAI : An exquisite wonder of Lucknowi Zaika -Ananya Srivastava

This time my quest for the Lucknowi Zaika brought me to a famous shop named Al-Madina Lassi and Kashmiri Chai located near Akbari Gate in the locality of Chowk (Old Lucknow), that serves the aromatic ” Kashmiri Noon Chai “. 175 kata lagi

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