Tag » Sufi

सोचकर इतनी क्यों हैरानी है

सोचकर इतनी क्यों हैरानी है
बर्फ पिघली है तब तो पानी है

अपने माज़ी से सीख़ ले लेना
बाकी दुनियाँ तो आनी जानी है

खेल दो दिन का सारा दोस्त मेरे
कोई राजा न कोई रानी है

मैंने है छोड़ दिया अब सजना
बस मेरी सोच अब सुहानी है

शक़्लों सूरत का क्यों है नाज़ तुझे
तेरी दो दिन की ये जवानी है

जो कोई सोचता है ख़ुद को ख़ुदा
उसको ठोकर अभी भी खानी है

कैसे ले जाओगे दुनियाँ को संग
मौत तो हर किसी को आनी है

क्या करेंगे किसी से छीन के हम
पाई पाई हमें चुकानी है

अब मुझे लगने लगा है “राही”
तेरी बातें बड़ी सयानी है

सोचकर इतनी क्यों हैरानी है ?

~ राही २०१६

Sep.21,2015

I saw the amber fields this autumn
Where verdant they had blossomed.
They grew until their time was done
And glistened gold into the sun.

tml

Poetry

Inside this new love, die.

Your way begins on the other side.

Become the sky.

Take an axe to the prison wall.

Escape.

Walk out like someone suddenly born into color. 47 kata lagi

Poetry

Translation - Non-fiction

Source Text

وليس هناك اخصائي معلوم ينفرد بإجراء عمليات الفصادة. إذ الغالب أن يقوم بها الحجام أو المزين أو البصير (الطبيب البلدي) أو القبالة وأمثالهم. وهناك من اشتهروا بإجراء هذه العملية لحسن أدائهم لها. 320 kata lagi

Translation Exercises