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Dişi Bilgeliğin Yolu

Feminen bilincin gizemini, kitaplardan, felsefe, din ve cesitli ogretileri okumus ustatlar veya ruhsal ogretmenlerden bir yere kadar ogrenebiliriz. Mesele su ki, kadinlarin bedenlerinde gizlenmis feminen bilinc, disi bilgelik, kutsal kadin, tanricanin bilgisi sadece kadinlarin bedenlerinde bu kodlari acmasi ile mumkun olacak. 460 kata lagi

Tüm Yazılar

Afghan official: Suicide attack kills 12 new army recruits

KABUL, Afghanistan (AP) — At least 12 new army recruits have been killed in a suicide bomb attack in the eastern city of Jalalabad, a hospital official said on Monday. 290 kata lagi

International News

Pemahaman Mengenai Haid

Haid merupakan situasi normal bagi setiap perempuan. Memasuki masa remaja, anak-anak perempuan biasanya mulai mendapat haid. Hal ini membuktikan seorang remaja telah berubah menjadi wanita dewasa. 167 kata lagi

Hormon

Cara Mengetahui Kesuburan Wanita

Banyak anggapan keliru yang beredar di masyarakat yang meyebutkan bahwa pada saat orgasme, wanita mengeluarkan sel telur. Dengan demikian, jika ingin hamil, wanita harus orgasme terlebih dahulu. 284 kata lagi

Wanita

Menghitung Usia Kehamilan

Banyak perempuan hamil yang tidak mengetahui secara pasti berapa usia kandungannya. Penyebabnya beraneka ragam, antara lain siklus haid yang tidak teratur, tidak ingat kapan mulai dan berakhirnya haid, atau tidak pernah memeriksakan… 515 kata lagi

Hamil

The last rites

“Have you ever danced with the devil, in the middle of the night…?”, Rahim asked.
Alisha did not quiet know the answer. Her hundred days away from home has taught her the virtue of silence. 138 kata lagi

Fiction

भक्ति काल: एक षड्यंत्र?

आज प्रातः ही मैंने भगवन विष्णु, आदि शेष व क्षीर सागर के विषय में लिखने का मन बनाया था पर प्रभु की कुछ और ही इच्छा थी। मुझे व्हाट्स ऍप पर
एक सन्देश प्राप्त हुआ जो की इस प्रकार है,
“जैसी परे सो सहि रहे, कहि रहीम यह देह ।
धरती ही पर परत है, सीत घाम औ मेह ।।

   रहीम कहते हैं कि जैसी इस देह पर पड़ती है – सहन करनी चाहिए, क्योंकि इस धरती पर ही सर्दी, गर्मी और वर्षा पड़ती है। अर्थात जैसे धरती शीत, धूप और वर्षा सहन करती है, उसी प्रकार शरीर को सुख-दुःख सहन करना चाहिए।”

प्रथम दृष्टि में इस दोहे में कोई बुराई नही पता चलती पर यदि आप इसे थोडा कुरेदने की कोशिश करेंगे तो आप को पता चलेगा की इस दोहे का कुप्रभाव क्या हो सकता है।
कबीर, रहीम, रवि और न जाने कितने ही दासों ने भारतवासियो को निकृष्ट व डरपोक बना दिया। रहीम का ये दोहा मनुष्य को सहने की शिक्षा देता है!
इस दोहे में सुख और दुःख की तो कहीं बात ही नही है सिर्फ इतना कहा गया है के जैसी देह पर बीते हमे सहते रहना चाहिए।
क्यों सहें भाई???
हमसे प्रभु श्री कृष्ण ने कहा है की अन्याय, अधर्म कभी सहना नहीं चाहिए, हम तो नही सहेंगे।
अब अगर इसका वो भावार्थ ही लेलें जो की लिखा हुआ है तो भी हम दुःख क्यों सहते रहें?? क्यों न हम दुःख का नाश करने के लिए पुरुषार्थ करें?
गीता में भगवन ने भी पुरुषार्थ करने के लिए कहा है!
ऐसे बहुत सारे दोहे मिल जायेंगे आपको भक्ति काल के जो किसी भी राष्ट्र की पीढ़ियों को बर्बाद करने के लिए काफी हैं।
स्वयं इस विषय में विचार कीजिये।
कबीर व रहीम जैसो के दोहों का यदि इतिहास देखा जाये तो वो भक्ति काल में मिलता है। भक्ति काल मुग़लों के समय में ही आरंभ हुआ था और कबीर का काल तो 1500 के बाद आया था इस काल तक अँगरेज़ भी भारत में आ चुके थे। हो सकता है अब मैं जो लिखू उससे आप सहमत न हो पर ये विचार योग्य बात है।
इस भक्ति काल के पीछे दो बातें हो सकती हैं। पहली ये के ये जितने भी दोहे वाले दास हैं वो इन मुग़लो या अंग्रेज़ो के एजेंट हो जिनका सिर्फ एक काम था गीता रामायण से पुरुषार्थ की शिक्षा लेने वाले हिन्दुओ को डरपोक, व निकम्मा बनाना ताकि जो कुछ उन पर बीते वो बिना विरोध के उसे सहते रहें।
पर फिर कबीर ने तो हिन्दुओ को भी गाली दी साथ साथ मुसलमान को भी गाली दी!
तो ये दास मुगलों के एजेंट नही होंगे शायद!!??
तब अँगरेज़ भी थे तो उनके पूजा के स्थल जैसे चर्च वगैरह तो होंगे ही न?
कबीर ने चर्च के विषय में तो कुछ लिखा ही नही?
शायद आज के अदर्श लिबरलों की तरह ही उन्हें चर्च “कूल” लगता होगा।
या फिर ये इन्हीं के एजेंट थे???
या फिर ये जितने भी दास हुए कभी पैदा ही नही हुए!!!??
खैर ये हो चाहे न हों, हमें एक बात सुनिश्चित कर लेनी चाहिए की हमारी आने वाली पीढियां इन दासों के दोहों से दूर रहे।

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